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Hanuman Chalisa

Hanuman Chalisa

श्री हनुमान चालीसा

Śrī Hanumān Cālīsā

Hanuman
Hanuman

What is the Hanuman Chalisa?

Hanuman Chalisa (Śrī Hanumān Cālīsā) is a Hanuman mantra dedicated to Hanuman. A devotional hymn of forty verses praising Lord Hanuman, the symbol of strength, courage and unwavering devotion.

Key Facts

Deity
Hanuman
Category
Hanuman
When to chant
Tuesday and Saturday mornings.
Repetitions
11 (one mala)
Related festival
Hanuman Jayanti

Meaning

A devotional hymn of forty verses praising Lord Hanuman, the symbol of strength, courage and unwavering devotion.

Pronunciation

Shree Hah-noo-maan Chaa-lee-saa

Benefits (Traditional Beliefs)

  • Believed to grant courage and strength
  • Said to remove fear and obstacles
  • Brings protection from negativity

When to Chant

Tuesday and Saturday mornings.

Related Festival

Hanuman Jayanti

Related Temple

Salasar Balaji

Hanuman Chalisa — Full Paath

3 dohas and 40 chaupais — scroll to read the complete paath.

Doha

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Doha

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

Chaupai 1

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

Chaupai 2

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

Chaupai 3

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥

Chaupai 4

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुँचित केसा॥

Chaupai 5

हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

Chaupai 6

संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥

Chaupai 7

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥

Chaupai 8

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥

Chaupai 9

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

Chaupai 10

भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥

Chaupai 11

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

Chaupai 12

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

Chaupai 13

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

Chaupai 14

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥

Chaupai 15

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥

Chaupai 16

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥

Chaupai 17

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

Chaupai 18

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

Chaupai 19

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥

Chaupai 20

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

Chaupai 21

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

Chaupai 22

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥

Chaupai 23

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

Chaupai 24

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

Chaupai 25

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

Chaupai 26

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

Chaupai 27

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥

Chaupai 28

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥

Chaupai 29

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥

Chaupai 30

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

Chaupai 31

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥

Chaupai 32

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

Chaupai 33

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥

Chaupai 34

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥

Chaupai 35

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

Chaupai 36

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

Chaupai 37

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

Chaupai 38

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

Chaupai 39

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

Chaupai 40

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

Doha

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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Reviewed by the Bhakti by Agentic Vani editorial team

Last updated June 29, 2026. Content is presented for devotional and educational purposes, with traditional beliefs framed as such.